विस्फोटक के आविष्कारक का शांति के लिए प्रयत्न : नोबेल पुरस्कार

By:  अनुराग मिश्रा

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21 अक्टूबर 1833 को स्वीडन के स्टॉकहोम में जन्मे अल्फ्रेड बर्नार्ड नोबेल के नाम पर हर वर्ष भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञानं, अर्थशास्त्र और शांति के क्षेत्र में मानवता की भलाई के लिए कार्य करने वालों को नोबेल पुरस्कार दिये जाते हैं। इसे विश्व का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है और हर साल स्टॉकहोम में आयोजित सम्मान समारोह में स्वीडन के राजा के द्वारा पुरस्कार का वितरण किया जाता है हालाँकि शांति का नोबेल पुरस्कार नार्वे के ओस्लो में नार्वे के राजा की उपस्थिति में दिया जाता है।

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 नोबेल के जन्म के वर्ष ही उनके पिता इमैनुएल नोबेल दिवालिया हो गए और अपना देश छोड़कर रूस के सेंट पीटर्सबर्ग जाकर रहने लगे और एक मैकेनिकल वर्कशॉप शुरू की और रूस की सरकार के लिए खेती के यन्त्र,सुरंगें और तारपीडो इत्यादि बनाने लगे। 9 वर्ष बाद पूरे परिवार को वहीँ बुला लिया और सभी साथ रहने लगे। लगभग सत्रह वर्ष की आयु में नोबेल को अमेरिका पढ़ने के लिए भेजा गया लेकिन वह एक वर्ष में ही वापस आ गए और पिता के कारखाने में ही अध्ययन और अनुसंधान में लग गए।

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नोबेल की रूचि यांत्रिकी, भौतिक विज्ञानं,रसायन विज्ञान के साथ-साथ चिकित्सा विज्ञान में भी थी। नोबेल इंजीनियर, रसायन शास्त्री और आविष्कारक थे। बचपन से तीक्ष्ण बुद्धि के नोबेल पेरिस,इटली,जर्मनी और अमेरिका गए और हर जगह से कुछ न कुछ सीखा। कई प्रयोगशालाओं में काम किया और बहुत कम आयु में ही विज्ञानं की अतुल्य और अद्वितीय समझ विकसित कर ली। इस दौरान  उनके भाइयों और पिता की कंपनी काफी तेजी से आगे बढ़ती गई और वे यांत्रिकी और रासायनिक उद्योग के मालिक बन गए।  
नोबेल परिवार युद्ध के लिए शस्त्र बनाता था लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद उन्हें सामान्य घरेलु वस्तुओं के उत्पादन में कठिनाई होने लगी और अंततः उन्होंने सन 1859 में स्वीडन वापस लौट जाने का निर्णय लिया।स्वीडन लौटने के बाद नोबेल ने नाइट्रोग्लिसरीन और अन्य विस्फोटकों का गहन अध्ययन शुरू किया।बाद में नाइट्रोग्लिसरीन से ही डायनामाइट नामक विस्फोटक बनाया गया।
अपने जीवनकाल में अल्फ्रेड नोबेल ने कुल 355 अविष्कार किये जिनमे डायनामाइट और धूम रहित बारूद अर्थात कॉर्डाईट भी शामिल है। नोबेल के अविष्कार ने तहलका मचा दिया। डायनामाइट और कॉर्डाईट का उपयोग युद्ध में विस्तृत रूप में होने लगा और अनगिनत निर्दोष लोगों की मृत्यु का कारण बने। लेकिन इन विस्फोटकों के अविष्कार ने नोबेल को मात्र चालीस वर्ष की आयु में बेशुमार दौलत का मालिक बना दिया।
वर्ष 1888 में एक फ्रांसीसी अख़बार की खबर पढ़कर नोबेल न सिर्फ दंग रह गए बल्कि इस खबर ने उनकी आँखें खोल दी। इसमें उनके ही निधन की सूचना थी और इसका शीर्षक था :

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“The Merchant of Death is Dead” अर्थात "मौत के सौदागर की मौत" और आगे लिखा था “Dr. Alfred Nobel, who became rich by finding ways to kill more people faster than ever before, died yesterday.”  अर्थात " डॉक्टर अल्फ्रेड नोबेल, जो कि पहले से कहीं ज्यादा तेजी से और अधिक लोगों को मारने के तरीके ढूंढने से अमीर बन गए,कल उनकी मृत्यु हो गई "  असल में यह खबर उनके भाई के निधन की थी जो अख़बार द्वारा गलती से छापी गई थी। अख़बार में छपे इस शीर्षक मात्र ने उन्हें झकझोर कर रख दिया और यह सोचने पर मजबूर कर दिया की वह भविष्य में आगे आने वाली पीढ़ियों द्वारा किस रूप में याद किए जाएं।

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दिसंबर 1896 में अपनी मृत्यु से पहले उन्होंने अपनी वसीयत में अपनी संपत्ति का ज्यादातर हिस्सा नोबेल पुरस्कार के नाम कर दिया।उनकी इच्छानुसार हर वर्ष मानव कल्याण के क्षेत्र में महान योगदान देने वालों को नोबेल पुरस्कार दिया जाता है। स्वीडिश बैंक में जमा राशि के ब्याज से नोबेल फाउंडेशन द्वारा साहित्य,शांति,भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र (वर्ष 1968 से शुरू) के क्षेत्र में मानव जाति के लिए कल्याणकारी कार्य करने वालों को नोबेल पुरस्कार दिया जाता है।

अमेरिकी प्रोफेसर रिचर्ड थैलेर को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है।

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वर्ष 1901 से लेकर 2016 तक कुल 881 लोगों और 23 संगठनों को नोबेल पुरस्कार दिया जा चुका है जिनमे 8 भारतीय भी शामिल हैं। 2017 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा जारी है। परमाणु हथियारों के विरुद्ध अभियान चलाने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था ICAN ( इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपन्स) को शांति के नोबेल , जापानी मूल के ब्रिटिश लेखक काजुओ इशिगुरो को साहित्य के नोबेल,स्विट्जरलैंड के जैकस डोबोकेट, अमेरिका के जोआकिम फ्रैंक और यूके के रिचर्ड हेंडरसन को जैविक अणुओं के उच्च संकल्प संरचना निर्धारण में क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी विकसित करने के लिए रसायन विज्ञानं का नोबेल,
अमेरिका के वैज्ञानिक बैरी बैरिश, किप थ्रोन और रेनर वेसिस को गुरुत्वीय तरंगों की खोज करने के लिए भौतिकी के नोबेल और अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों जैफ्री सी हाल, माइकल रोसबाश और माइकल डब्ल्यू यंग को मानव शरीर की ‘‘आंतरिक जैविक घड़ी अर्थात बायोलॉजिकल क्लॉक’’ विषय पर किए गए उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए इस साल के चिकित्सा के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है और इन सभी को दिसंबर में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में नोबेल पुरस्कार दिए जाएंगे। 

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