गाँधी : व्यक्ति नहीं विचार

By:  अनुराग मिश्रा

http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg

मोहनदास करमचंद गाँधी : एक महान क्रन्तिकारी व्यक्तित्व जिन्हे भारत ही नहीं अपितु विश्व में उनके अतुल्य, अपूर्व ,विशिष्ट और अनोखे आंदोलन की विधि के लिए जाना जाता है।एक समय जब विश्व में तमाम आंदोलन और क्रान्तियाँ हिंसा के माध्यम से ही संभव होती दिख रही थी और विश्व लहू की लाल आंधी में भीग रहा था, एक साधारण से कद काठी और पतले-दुबले शरीर वाले ,हाथ में छड़ी लिए,धोती पहने और ऐनक लगाए एक व्यक्ति ने भारत ही नहीं बल्कि समस्त विश्व को अहिंसात्मक प्रतिकार के मार्ग पर चलकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को तत्कालीन विश्व के सबसे कुशल,शक्तिशाली और क्रूर शासक से आज़ादी दिलाकर चकित कर दिया।

http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg

कोई व्यक्ति जन्म से महान नहीं बनता बल्कि अपने कर्मों से बनता है और ये बात गाँधी जी ने साबित की जिन्हे आगे चलकर महान कवि और साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा "महात्मा" अर्थात महान आत्मा की उपाधि दी गई। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कुशल और सर्वोत्तम नेतृत्व के लिए उन्हें "राष्ट्रपिता" की उपाधि दी गई है और स्नेह के साथ पूरे देश में "बापू" के नाम से भी सबोधित किया जाता है।

2 अक्टूबर 1869  को पश्चिमी भारत में गुजरात के पोरबंदर में जन्मे महात्मा गाँधी के पिता करमचंद गाँधी ब्रिटिश शासन के काठियावाड़ के एक छोटी सी रियासत पोरबंदर के दीवान थे। आत्मशुद्धि के लिए उपवास,सर्वधर्म और सर्वजाति समभाव और शाकाहारी जीवन जीने की प्रेरणा उन्हें अपनी माँ पुतलीबाई से मिली। मात्र साढ़े तरह वर्ष की आयु में उस समय उस क्षेत्र में प्रचलित व्यवस्थित बल विवाह प्रथा के अंतर्गत उनका विवाह कस्तूरबा माखन जी से कर दिया गया। पढाई में एक औसत दर्जे के छात्र रहे गाँधी जी लगभग 19 वर्ष की आयु में सन 1888 में कानून की पढाई करके बैरिस्टर बनने के उद्देश्य से यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में दाखिला लिया। उनका परिवार उन्हें बैरिस्टर बनाना चाहता था। यहां उन्होंने वक़ालत की पढाई के साथ-साथ सभी धर्म शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। टॉलस्टॉय के ईसाई धर्म पर विचार,क़ुरान के अनुवाद,हिन्दू और विश्व दर्शन और भगवदगीता का गहन अध्ययन किया।

http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg

उन्हें पहली बड़ी सफलता सन 1918 में बिहार के चम्पारण और गुजरात के खेड़ा के किसानों के आंदोलन में मिली। अंग्रेज़ गरीब किसानों को खाद्य फसलों के बजाय नील की खेती करने के लिए बाध्य कर रहे थे और उनको फसल की पूरी कीमत भी नहीं देते थे। इसी बीच एक विनाशकारी अकाल के बाद क्रूरता से गरीब किसानों पर कर लगा दिया गया और किसानों की हालत दयनीय हो गई। किसानों के इस संघर्ष में क्रूर ज़मींदारों के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व गाँधी जी ने किया और अंततः अंग्रेज़ों को किसानों की मांगे माननी पड़ीं। इस आंदोलन के बाद गाँधी की ख्याति देश भर में फ़ैल गई।

फरवरी 1919 में गाँधी जी ने वायसराय को रौलेट एक्ट के विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन करने की चेतावनी दी। रौलेट एक्ट के तहत बिना मुकदमा चलाए किसी को भी जेल भेजे जाने का प्रावधान था।ब्रिटिश सरकार द्वारा अनसुना कर दिए जाने के बाद देश सविनय अवज्ञा आंदोलन में कूद पड़ा और इसी दौरान जलियांवाला बाग नरसंहार जैसी वीभत्स घटना घटी।

 

http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg

गाँधी जी ने 1 अगस्त 1920 को अहिंसा के सिद्धांत पर असहयोग आंदोलन की शुरुआत की। इस आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया।असहयोग आंदोलन को अपार समर्थन मिल रहा था लेकिन इसी दौरान कई हिंसक घटनाएं भी सामने आ रही थीं। चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद फ़रवरी 1922 में उन्हें ये आंदोलन वापस लेना पड़ा। राजद्रोह के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर 6 वर्ष की सजा सुनाई गई लेकिन ख़राब स्वस्थ्य के कारण उन्हें 2 वर्ष में रिहा कर दिया गया।अगले कई वर्षों तक गाँधी जी राजनीती से दूर रहकर अन्य सामाजिक कुरीतियों जैसे अस्पृश्यता,शराब,अज्ञानता और गरीबी इत्यादि के विरुद्ध कार्य करते रहे और वर्ष 1928 में लौटे।

 

1928  के कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशन में गाँधी जी ने अंग्रेज़ों से भारतीय साम्राज्य को सत्ता प्रदान करने के लिए कहा और ऐसा न करने पर असहयोग आंदोलन के लिए तैयार रहने की चेतावनी भी दी। 31 दिसंबर 1929 को लाहौर में पहली बार भारतीय झंडा फहराया गया और 26 जनवरी 1930 को देश के  लगभग सभी संगठनों ने स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया।इसके बाद मार्च 1930 में गाँधी जी द्वारा नमक पर कर लगाए जाने के विरुद्ध सत्याग्रह की शुरुआत की गई जिसे दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह किया गया जिसमे गाँधी जी द्वारा 400 किलोमीटर की यात्रा की गई जिसमे लाखों ने भाग लिया। यह सबसे सफल आंदोलन रहा। लगभग 80,000 लोगों को जेल भेजा गया। गाँधी-इरविन संधि के बाद सभी कैदियों को रिहा करने पर सहमति बनी और समझौते के परिणामस्वरूप गाँधी को गोलमेज सम्मलेन के लिए लंदन से बुलावा आया। यह सम्मलेन निराशाजनक रहा और गाँधी को गिरफ्तार कर लिया गया। इरविन के उत्तराधिकारी वेलिंग्टन ने स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए नए दमन चक्र की शुरुआत की।

http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg

8 अगस्त 1942 को कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन में "करो या मरो" के नारे के साथ महात्मा गाँधी ने :भारत छोडो आंदोलन" की शुरुआत की। भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष का यह सबसे सफल आंदोलन था। इसमें व्यापक गिरफ्तारियां हुईं,हिंसा भी हुई और लाखों लोग घायल हुए और बहुत से क्रन्तिकारी शहीद भी हुए लेकिन गाँधी जी ने इस आंदोलन को वापस नहीं लेने का निर्णय लिया था। 9 अगस्त 1942 को गाँधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया और 2 साल के लिए क़ैद में रखा गया और इसी दौरान उनकी पत्नी की मृत्यु भी हो गई। बाद में मलेरिया से पीड़ित होने के बाद 6 मई 1944 को गाँधी जी को रिहा कर दिया गया। ऐसा प्रतीत होने लगा था की द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत तक भारत को स्वतंत्रता मिल जाएगी। गाँधी जी ने आंदोलन वापस ले लिया और लाखों राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया गया।

http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg

अब जब देश का स्वतंत्र होना निश्चित था, जिन्ना के नेतृत्व में एक पृथक मुस्लिम बाहुल्य देश की मांग तेज होने लगी थी जो की गाँधी की सोच के बिलकुल विपरीत थी। गाँधी जी कभी नहीं चाहते थे की देश का विभाजन हो। इस दौरान देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे होने शुरू हो गए जिनको रोकने के लिए गाँधी जी ने हर संभव प्रयास किये। शांति की स्थापना के लिए उन्होंने आमरण अनशन किया जिसका चमत्कारिक परिणाम देखने को मिला। कई जगह सभी समुदायों के लोगों ने हिंसा का त्याग किया और शांति यात्राएं भी निकालीं लेकिन इससे देश के बंटवारे को नहीं रोका जा सका।

 

30 जनवरी 1948 को दिल्ली के  बिड़ला हाउस में प्रार्थना के लिए जाते समय एक हिन्दू राष्ट्रवादी नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। समूचा विश्व शोक में डूब गया। विश्व में शायद ही कोई ऐसा देश या ऐसी हस्ती होगी जिसने मानवता के इस महान खद्दरधारी संत को श्रद्धांजलि अर्पित न की हो।

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक बार गाँधी जी के बारे में कहा था, ‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ ऐसा भी कोई मानव इस धरती पर जन्मा  था’  

http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg http://alldatmatterz.com/img/article/1182/gandhi.jpg
tumbler

Comments




YOU MAY ALSO LIKE


Light triumphs over dark and good triumphs over evil: The story behind Diwali

Anupam Kher – new FTII chairman

Talwars Acquitted Of Daughter Aarushi's Murder By Allahabad High Court

कांचा इलैया,उनकी किताबें और विवाद : पूरा मामला

करवाचौथ : सौभाग्य और प्यार का त्यौहार


Light triumphs over dark and good triumphs over evil: The story behind Diwali

Anupam Kher – new FTII chairman

Talwars Acquitted Of Daughter Aarushi's Murder By Allahabad High Court

कांचा इलैया,उनकी किताबें और विवाद : पूरा मामला

करवाचौथ : सौभाग्य और प्यार का त्यौहार